Posts filed under 'समाज'

ये दलित पत्रकार की खोज क्‍या बला है…..

अचानक संवेदनशीलता का ज्‍वार उमड़ पड़ा, मीडिया में दलितों की खोज हो रही है. इस बात पर बहस छेड़ने की कोशिश हो रही है कि मीडिया में दलित उपेक्षित क्‍यों हैं….. अचानक इसकी जरूरत क्‍यों आ पड़ी? किस छिपे हुए एजेंडे को लेकर यह षड्यंत्रपूर्ण बहस छेड़ी गई है? शायद बहस के लिए कोई और विषय नहीं बचा तो सोचा कि चलो यही पता करते हैं कि न्‍यूज़रूम में कितना जातिवाद है? गोया समाज में पहले से फैला जातिवाद कम है…. (more…)

Add comment February 10, 2008

गांवों में क्‍या इंसान नहीं रहते डॉक्‍टर साब?

सरकार ने कहा कि डॉक्‍टरों को एक साल गांवों में काम करने के बाद ही उपाधि दी जाएगी तो इसे लेकर हाय तौबा शुरू हो गई.  लड़कियों ने मंत्री महोदय को शादी करने के लिए प्रपोज़ कर के विरोध जताया.  ठीक है भई लोकतंत्र की आजादी की सुविधा जो मिली है.  लेकिन क्‍या गांवों में काम करने को कहना इतनी बड़ी सजा है कि आपको इस हद तक विरोध जताने के लिए जाना पड़े? (more…)

Add comment December 5, 2007


 

November 2009
M T W T F S S
« Feb    
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30  

Archives

Recent Posts

Recent Comments

Category Cloud

Uncategorized विविध समाज

Meta

चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी